डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों की मौत, भयावह 

जी हाँ  चौंक गए ना आप , अगर में कंहू की आंकड़ा एक साल में रोड एक्सीडेंट्स में मारे  जाने वाले लोगो का है तो अब आपका आश्चर्य थोड़ा कम हुआ होगा ,कुछ बोलेंगे चूतिए बनाता है ऐसे टाइटल देके , ये तो हर साल मरते हैं।  जी हाँ आप की इसी लापरवाही की वजह से , हर साल होता है ,चलता रहता है ये तो की वजह से आंकड़ा बढ़ ही रहा है साल दर साल काम नहीं हुआ।  क्या हम इतने संवेदनहीन हो चुके की जब तक खुद पर नहीं बीतेगी हम नहीं जगेंगे।  हम  कोई फर्क  नहीं  पड़ता

तो सुन लो आप और ये तमाम सरकारें चाहे राज्य की हों या देश  की , अगर डेढ़ लाख लोगों की मौत से  फर्क नहीं पड़ता , आप कुछ करने या सोचने के  लिए  विचलित  नहीं होते  तो आप जैसी सरकारों और हम जैसे नागरिको पर धिक्कार है। अरे इतने लोगों की जान की बाजी लगाकर तो हम आधा विश्व जीत चुके होते।  क्या आपको पता  है 1965  में शहीद सैनिक लगभग  3000 व् 1971 में  लगभग 4000 सैनिक शहीद हुए और कारगिल वॉर में 527 . और यंहा तक की आतंकी हमले ,नक्सली हमलों में भी यह आंकड़ा हजारों में ही हैं। यंहा में शहीदों  से किसी की तुलना नहीं कर रहा वो महान हैं और रहेंगे  , में बस इतना कह रहा हूँ की युद्ध जैसे आपदा की परिस्थितिओं  में भी हमने इतनी बड़ी संख्या में लोगों की जान नहीं गंवाई और  वो युद्ध था जो की हमारे कंट्रोल में नहीं था।  और पूरा देश शहीदों के साथ खड़ा था और हमेशा रहेगा।  पर में ये कह रहा हूँ जब हमारे हर साल लाख , दो लाख के करीब लोग सड़क हादसों का शिकार होकर  अपनी जान से हाथ धो रहें  तो क्या ये विषय हमे अब भी सोचंने पर विवश नहीं करता। .सोचिये गंभीरता से सोचने की जरुरत है

जरूरत है इस बात की हर सरकार अपनी पॉलिसीज  में रोड सुरक्षा जैसे विषय को पूर्ण गंभीरता के साथ शामिल करे।  राजनैतिक पार्टियां बिना किसी राजनीती के इस मुद्दे पर साथ आएं और बेहतर से बेहतर रोड सेफ्टी सुनिश्चित करें। हम चाहे किसी धर्म ,जाती ,क्षेत्र से हों इस विषय को एक जान आंदोलन बनाएं क्यूंकि इसे केवल  सरकारों के भरोसे  नहीं छोड़ देना चाहिए हमे भी अपनी तरफ से पूर्ण जिम्मेदारी निभानी चाहिए। क्यूंकि हम सब इस रोड पर चलते हैं। हमें इस वर्तमान नस्ल की आदत बदलनी है उसे ज्यादा से ज्यादा रोड सेंसिटिव बनाना है और आगे आने वाली नस्लों को, उसकी  रगों में जैसे गीता कुरआन बाइबिल गुरवाणी का प्रवाह  करते हैं वैसे ही रोड रूल्स और धीमे गाड़ी चलना, उनकी रगों में अपने धर्म के ज्ञान की तरह बसाए देना हैं इसे भगवान  की मर्जी पर ना छोड़ें , जब हम खुद अपनी ही मदद नहीं करेंगे तो भगवान्  भी क्यों करेंगे।  तो आओ क्लो शपथ लेते हैं हम हमेशा ट्रैफिक रूल्स फॉलो करेंगे और हमेश कम से कम स्पीड में गाड़ी चलाएंगे। कोई अमीर है  तो कम स्पीड में गाडी चलवाना अपने ड्राइवर से।  इसे अपनी आदत बना लें।  और प्लीज इसे इतना शेयर करें की सरकार की कुछ तो आंखें खुले और वो इस मामले  में कोई ठोस कदम उठाए , कोई माकूल प्लान तैयार करे
हम सब रोड पर चलते हैं
और हम सबका, घर पर कोई इन्तजार करता है
प्लीज शेयर मैक्सिमम
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