बाहुबली 1000 करोड़ के पार , इस पत्तरकार की सुलग गई

जिस बाहुबली का डंका पुरे देश ही नही विदेशों में भी बज रहा है, पूरा भारत जिस फ़िल्म पर इतरा रहा है , विदेशी  भी भौचक्के हैं , उस फ़िल्म से अगर किसी  की जले तो शक तो होता ही है , आखिर किसने किसकी कितनी ली जो इसकी इतनी जली , lallnatop  वेबसाईट ने ये खबर छापी है  किसी और के हवाले से है लेकिन स्पष्टीकरण निचे दिया ,मतलब आप भी मूक रूप से सहमत है जिसने भी ये आर्टिकल लिखा है उससे ,  तो  सुन लो अब सौरभ दुब्बे  और अपूर्व पाठक अब तुम एक पेटी बर्नोल की ख़रीद ही लो क्योंकि अव तुम्हारी और जलने वाली है,
खुद तो कुछ कर नही सके जीवन में सिर्फ जिन बड़े लोगों से यारी है उन्ही से रिक्वेस्ट कर कर के ,उनके इंटरव्यू छाप छाप के अपने आपके को पत्तरकार समझने की जो भूल तुमने पाली है ना उससे हमे  कोई दिक्कत नही, पर ऐसी ही किसी की मेहनत पर टिका टिप्पणी जो तुम दिए हो तो अब हमारी टपपनी सुन लो तुम भी  , राजमौलि ने मेहनत  की है, बाँदा की मगधीरा देखो तुम्हारी और जलेगी मक्खी देखो थोड़ा और जलानी  हो तो , अपने आप को हर लेवल पर बढ़ा रहा है बंदा और तुम्हे औसत लग रही है  । तुम  खुद को देखो बे  परजीवी हो पर टिप्पणी ऐसी दियो है की टाइटेनिक  तुम्हारी ही रचना है , सही है बे  है  , इत्ता  ओवर कॉन्फिडेन्स लाते कहा से हो, कौनसा माल फूंकते हो ,  तुम बस लिंक भिड़ा भिड़ा के अपनी website  का जो सारे बिहारियो से जो तुम दिन रात परचार करवाये हो सब पता है। अगर तुमने मेहनत की होती तो पता चलता ना ,  लेफ्टिस्टों लिबरल्स की गोदी में बैठकर तुम बिना कुछ मेहनत कि जो  अपना प्रमोशन पा रहे हो ,कर लो परचार खूब करो परचार  ।

तो दोस्तों आप बचपन में खूब सोचे होंगे ना की , कैसे जयचन्द ने अपने ही देशवासी  पृथ्वीराज  चौहान का साथ न देकर गौरी का साथ दिया था , क्यों किया ऐसा  । तो देख लो ताज़ा नमूना । 12 वीं सदी में में भी लालची , परजीवी , दुसरो को बाप को अपना बाप बोलने वाले  लोग पैदा होते थे।

आओ कभी हवेली पर  दुबे, तुम्हे चौबे बनाते है।

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chhote mama

sapna k chhote mama hain hum ynha koi baat nhi hogi , haveli par ana

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