भरतपुर गर्ल दिव्या काकरान ने हराया फोगाट बहनों को और बनी भारत केसरी

भिवानी में चल रहे भारत केसरी दंगल में लगातार तीन  दिनों तक भीड़ मशहूर फोगाट बहनों की हौसला अफजाई करती रही. पर उस भीड़ को दंगल के अंतिम दिन अपनी नई प्रिय खिलाडी मिल गई. दिव्या काकरान का पिछला साल का अधिकतम समय अपनी किडनी की समस्या से जूझते हुए बीता जिसके कारण उसे लगभग हर बड़े टूर्नामेंट से बाहर रहना पड़ा.

लेकिन शुक्रवार को जब वो अखाड़े में वापस लौटी तो होमटाउन की फेवरेट खिलाडी गीता फोगाट को सेमीफाइनल में हराते हुए एक बड़ा उलटफेर कर दिया. किसी को भी गीता फोगाट के हारने का जरा भी अंदाजा नही था वो भी उस खिलाडी से जो पिछले एक साल से बीमारी के कारण ज्यादातर मैच खेल नही पायी है. दिव्या काकरान ने गीता फोगाट को हराकर उलटफेर तो किया ही परन्तु वो केवल यही पर नही रुकी, उसने फ़ाइनल में नेशनल चैंपियन रितु मलिक को भी हराकर दूसरा बड़ा उलटफेर किया और दस लाख रूपये की इनामी राशि और ख़िताब दोनों अपने नाम किये.

Divya Kakran with prize money and Gurj

दिव्या ने ड्रामे से परिपूर्ण फ़ाइनल में रितु को 3-2 से हराया. दिव्या 1-2 से पीछे चल रही थी लेकिन अंतिम 30 सेकंड्स में रेफरी ने रितु के रक्षात्मक खेल के कारण एक पॉइंट दिव्या को दे दिया और दिव्या ने एकदम अंतिम क्षण में एक पॉइंट और रितु से झटक लिया. खेल के समाप्त होने के बाद रितु स्वयं  को विजेता समझ रही थी. दिव्या ने तब स्कोरबोर्ड की और इशारा करते हुए रितु को  बताया. रितु ने इस पर काफी देर बाद आपत्ति जाहिर की जिसे ख़ारिज कर दिया गया.

इस जीत  के बाद दिव्या ने अपने कोच को गले लगा लिया और चारों और उछल-2 कर अपनी ख़ुशी जाहिर की, भीड़ में भी केवल दिव्या -2 का शोर हो रहा था.

दिव्या ने बताया  “कोमनवेल्थ गेम्स से पहले मिली ये जीत  मेरे लिए काफी अहम है ,लगभग एक साल से मैं  रेसलिंग मेट से ही दूर रही हूँ. किडनी के इलाज के लिए 10 दिन तक एम्स में भी भरती रहना पड़ा सही समय पर मेरा  इलाज हो गया”.

दिव्या के पिता सूरज,  इनाम से ज्यादा इस बात पर खुश थे की उसने फोगाट सिस्टर को उसी के गढ़  भिवानी में में हराया है. दिव्या का गृहनगर राजस्थान का भरतपुर है.  दिव्या के अनुसार ये बहुत बड़ी जीत थी और अब नेशनल चैंपियन रितु को हराना और बड़ी बात है. ये एक रोमांचकारी अनुभव है. अब कोमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड लाना लक्ष्य है.

 

भिवानी में चल रहा  भारत केसरी दंगल तीनों  फोगाट बहनों के लिए निराशाजनक रहा

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