अमीर चोर माल्या के लिए सर्वसुविधा वाली जेल, गरीब चोरों को ठुल्लू . कानून बिक गया ?

लगता है भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या को इस बात का अहसास हो रहा है कि उनके भारत प्रत्यर्पण से संबंधित चल रहे मुकदमें में फैसला उनके खिलाफ आएगा और उन्हें भारत वापस आना होगा। शायद यही वजह है कि गुरुवार को हुई मामले की ताजा सुनवाई को दौरान माल्या के वकील ने ब्रिटिश कोर्ट में भारतीय जेलों की बुरी स्थिति की बात कही। लंदन के वेस्टमिंस्टर कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान माल्या के पक्षकार ने कहा कि प्रत्यर्पण को चुनौती देने के लिहाज से भारत में जेलों की बुरी हालत भी एक महत्वपूर्ण बिंदु है।

इधर, भारत सरकार को भी लग रहा है कि माल्या जेलों की अच्छी स्थिति नहीं होने का मुद्दा आगे भी जोर-शोर से उठा सकते हैं। ऐसे में केंद्रीय गृह मंत्रालय के सचिव राजीव महर्षि ने 23 जून को महाराष्ट्र के मुख्य सचिव सुमित म्युलिक को पत्र लिखकर राज्य में जेलों की स्थिति को लेकर कुछ पूछताछ की। दरअसल, संभावना यह है कि भारत वापसी पर माल्या को मुंबई के ऑर्थर रोड जेल में रखा जाएगा

अधिकारी ने बताया कि मुंबई में जेलों की हालत बिल्कुल अच्छी है और बुनियादी मानवाधिकार का उल्लंघन कभी नहीं होता। हाल ही में वरिष्ठ जेल अधीक्षक (सीनियर सुपरिंटेंडेंट ऑफ जेल) के पद से रिटायर हुए विजय बेंद्रे ने कहा, ‘मुंबई में हमारे पास पीटर मुखर्जी और छगन भुजबल जैसे बेहद हाई प्रोफाइल विचाराधीन कैदी हैं। एक और बड़े बिल्डर को भी यहीं रखा गया है।’ उन्होंने कहा, ‘2009-2010 तक महाराष्ट्र में सर्वोत्तम व्यवस्था वाले जेल थे। अब भी हमारे जेल ऐसे बड़े रुतबे वाले कैदियों को रखने के लिहाज से बिल्कुल अच्छे हैं।’

इस खबर में जिस बात पर आपका ध्यान जाना चाहिए पढें आगे

मतलब की आप अमीर अपराधी हो तो सरकार , अधिकारी , राजनयिक , मानवाधिकार सभी आपके लिए चिंतित होंगे , आपकी परेशानियाँ इनसे देखी नही जाएँगी , गर गरीब हो तो जाओ भाड़ में . अरे फिर किस मुंह से कहते हो  कानून के लिए सब बराबर हैं , दो बिंदु जिन पर हम ध्यान दें

पहला –  जब कैदी को  इतनी सी भी तकलीफ नही देनी तो उसे कैद करना ही क्यूँ , क्यूँ मजाक उडवाना सिस्टम का ,

दूसरा – अगर आराम देना ही है तो अमीर  गरीब का अंतर क्यूँ ?

अब आपको कंही से भी  लगता है कि  ऐसे कैदी जब जेल से बाहर  निकलेंगे तो इनकी मोटी,बेशर्म ,निर्लज्ज चमड़ी पर कोई फर्क पड़ेगा , अरे सुधरना तो दूर की बात ये सुधरने का सोचेंगे  भी नहीं , अगर फिर भी इन  तथाकथित अमीर अपराधियों में से एक भी सुधरने की  सोचता है तो उसे सच में महात्मा घोषित कर देना चाहिए ,

लोग भीडतंत्र की आलोचना करते हैं में भी करता हूँ , पर एक बात दीगर है कि भीड़ कभी अमीर गरीब नही देखती उसे अगर पेलना है तो वो पेल देगी आपको आप चाहे अमीर हों या गरीब

क्या न्याय व्यवस्था में  अपराधियों के साथ इतना दोहरा व्यवहार  अराजकता को बढ़ावा नही देगा ?

Facebook Comments
(Visited 30 times, 1 visits today)

Leave a Reply

%d bloggers like this: