जिसकी दी रोटियां , वही नोच रहे बोटियाँ

शरणागत की रक्षा करना भारतीय संस्कृति का एक आवश्यक अंग हैं. हिंदुस्तान हमेशा से इस इस नीति का अनुसरण करता आया है, और कतिपय इन्ही कारणों से हिंदुस्तान ने सबसे ज्यादा विदेशिओं के हमले झेले हैं. जिनको शरण दी गयी उन्होंने कृतज्ञ रहने की वजाय हमारी ही  अस्मिता को ठेस पहुंचाई और  इस नीति पर ही  सवाल उठाये हैं. चूँकि “अति सर्वत्र वर्ज्यते” अतः हर नीति को कसौटी पर परखना चाहिये कि कहीं उस नीति से देश को कोई हानि तो नही हो रही, किसी भी क्षेत्र में अति नुकसानदायक  होती है. अतः कोई भी व्यक्ति हो या देश उसे स्वयं में इस बात का पुनरावलोकन करना चाहिये.

कुछ ऐसी ही परिस्थितियां आज ब्रिटेन के सामने खडी हैं. ब्रिटेन ने हर किसी को अपने देश में शरण देकर ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न कर ली हैं कि ब्रिटेन के मूल निवासियों का ही ब्रिटेन में जीना मुहाल हो गया है. खासकर महिलाओं के प्रति होने वाले अत्याचारों में काफी बढ़ोतरी हुयी है. अब जब शरणार्थी ही अपने देश की महिलाओं पर अत्याचार करने लग जायें तो क्या उस देश को अपनी नीतियों का पुनरावलोकन नही करना चाहिये. दुनिया के हर वांछित अपराधी को जब कंही जगह नही मिलती छुपने की तो वो ब्रिटेन को ही भागता है. ब्रिटेन अपराधियों और आपराधिक वृत्ति वाले लोगों के स्वर्ग बनता जा रहा है, और वंहा के नागरिकों के लिए नरक बनता जा रहा है.

ब्रिटेन की इसी नीति का विरोध करने के लिए ब्रिटेन में एक आन्दोलन चल रहा है जो ब्रिटेन की वर्तमान  माइग्रेंट पालिसी का विरोध कर रहा है. ये आन्दोलन “ब्रिटेन फर्स्ट” नाम की एक संस्था चला रही है. “ब्रिटेन फर्स्ट” की उप नेता जायदा फ्रेंसन जो की ब्रिटेन की आयरन लेडी के नाम से मशहूर है, ब्रिटेन की माइग्रेंट पालिसी का मुखर होकर विरोध कर रही हैं. उन्होंने इसके लिए USA के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प तक से गुहार लगायी है. ट्वीटर से एक विडियो सन्देश के जरिये उन्होंने USA के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मदद की गुजारिश की है. ऊपर दी गयी फोटो जायदा फ्रेंसन ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर की है, जिसमे शरणार्थीयों के द्वारा प्रताड़ित हुयी महिलाओं के फोटोज  को एक साथ लगाया गया है. ये सभी महिलाएं शरणार्थीयों की हिंसा का शिकार बनी हैं.

ब्रिटेन शाषन को अब कुम्भकर्ण की निद्रा और शरणार्थी मोह त्याग कर अपने देश की महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों को रोकने के लिये कढ़े और ठोस कदम उठाने की जरुरत है.

 

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