केंद्र में विरोध तो फिर भरतपुर में वंशवाद को क्यूँ समर्थन – बीजेपी की दोहरी नीति

अपने हर चुनावी कैम्पेन में वंशवाद के खिलाफ प्रहार करने वाली बीजेपी, अब शनै -शनै स्वम् ही वंशवाद को बढ़ावा देने में लगी हुयी है . बीजेपी हमेशा से कांग्रेस के प्रमुख नेतृत्व पर वंशवादी होने का आरोप लगाती रही है .परन्तु गौरतलब है कि जहाँ कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व अपने आपको गांधी परिवार से इतर किसी और नौका में बैठकर चुनावी की नदी में तैरने की कोशिश करता हुआ भी नजर नही आता, वंही बीजेपी भी अब अपवाद नही रही है. बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व में भले ही वंशवाद का उदाहरण देखने को नही मिले पर निचले स्तर पर वंशवाद के सैकड़ों उदाहरण मिल जायेंगे. ये उदाहरण बीजेपी के वंशवाद के खिलाफ होने के दम्भ को चकनाचूर कर देते हैं. क्या बीजेपी के संरक्षक संघठन आरएसएस को इसमें दखल देने की आवश्यकता महसूस नही होती ? क्योकि आरएसएस हमेशा से योग्यता को बढ़ावा देता आया है ना कि वंशवाद को.

अभी ताजा प्रकरण आप राजस्थान के भरतपुर में बीजेपी की राजनीति में देख सकते हैं . भरतपुर बीजेपी के दिग्गज नेता, पूर्व केबिनेट मंत्री व पूर्व विधायक (डीग-कुम्हेर) डॉ दिगम्बर सिंह के असामयिक निधन के बाद , भरतपुर में बीजेपी की कमान डॉ दिगम्बर सिंह के सुपुत्र डॉ शैलेश सिंह के हाथों में स्वतः ही चली गई है. यह सब अब एक ताजपोशी होने जैसा बन गया है. जब यही सब करना था तो क्यूँ लोकतंत्र के लिए इतने कष्ट उठाये हमारी पूर्व पीढ़ियों ने , ऐसी व्यवस्था तो पहले से ही चल रही थी. आपने भरतपुर के कई बीजेपी नेताओं को विपक्षी पार्टी कांग्रेस के नेता महाराज विश्वेन्द्र सिंह के समर्थकों से व्यंग्यात्मक लहजे में ये कहते हुए अवश्य देखा होगा कि ” राजतन्त्र चला गया अब क्यूँ अन्धो की तरह महाराज को वोट देते हो, हमे वोट दो क्यूंकि हम आप ही में से है ना कि किसी राजवंश में जन्मे हुए राजकुमार हैं” . अप्रत्यक्ष रूप से महाराज विश्वेन्द्र सिंह के समर्थकों को राजवंश के गुलाम बोलते हुए देखा जा सकता है

लेकिन क्या अब बीजेपी ऐसा कह सकती है ? जी नही अब बीजेपी को ऐसा कहने का कोई अधिकार नही रहा क्यूंकि अब बीजेपी ने भी अपना राजवंश चुन ही लिया है तो फिर अब कैसे किसी और को वो उलाहना दे सकती है . सामने वाले अगर महाराज विश्वेन्द्र सिंह जैसे एक राजवंशी के समर्थक है तो आप भी कम नही हो आप इस स्वतंत्र भारत में एक नये राजवंश का निर्माण करने की और अग्रसर हो. क्या भरतपुर की बीजेपी में डॉ शैलेश सिंह से अधिक मंझा हुआ जुझारू निष्ठाशील आरएसएस के आदर्शों का पालन करने वाले नेता नही है ? ये विचारणीय प्रश्न है. जिस वंशवाद के चलते योग्य व्यक्ति को अपने अवसरों से हाथ धोना पढ़ता है , हम उसी का समर्थन करते जा रहे हैं ? देश का जनमानस अगर ऐसे मौकों पर नही बोलेगा तो भविष्य में उठने वाली समस्याओं के लिए तैयार रहें.

क्या आप बीजेपी के इस वंशवाद को अपना समर्थन देते है ?

  • नहीं (53%, 21 Votes)
  • हां (20%, 8 Votes)
  • ये वंशवाद नही है (28%, 11 Votes)

Total Voters: 40

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