ये है देश की असली वैम्प , परेश रावल ने लिया निशाने पर

मशहूर एक्टर और बीजेपी सांसद परेश रावल ने विवादित लेखिका अरुंधती रॉय को निशाने पर लेते हुए ट्विट  किया कि सेना को कश्मीर में पत्थर फेंकने वाले की जगह अरुंधती रॉय को जीप  के आगे बांधना चाहिए था . उनका इशारा हाल  ही  में वायरल हुए एक विडियो की तरफ था जिसमे सेना ने एक पत्थरबाज को जीप  से बांध रखा था और अपना बचाव कर रही ताकि गोलियां भी न चलानी पड़े पत्थरबाजों पर  . अब ये भी सोचने वाली बात है की एक संजीदा अभिनेता और सांसद भला किसी महिला के बारे में ऐसा क्यूँ कहेगा

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हम बताते हैं आपको  आखिर क्यूँ परेश रावल ने अरुंधती के लिए इतने कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया . इसका कारन खुद अरुंधती रॉय है उन्होंने कहा की 70 लाख भारतीय सेना भी कश्मीर की आजादी गैंग को हरा नही सकती . अब ये जहर भरी बातें हिंदुस्तान के लिए जब इसी देश का नमक खाने वाला जयचंद  बोले तो किसी भी हिन्दुस्तानी का खून खौल  उठेगा .

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प्रश्न उठता है  क्या अब ऐसे महान कृत्य करने  वाली इन मैडम का  स्वागत फूलों से किया जाना चाहिए , आखिर कौन है ये जो  हमारे देश के बारे में हमेशा अपनी जुबान से जहर ही फैलाते हैं . क्या अरुंधती का ये कथन करोडो भारतीयों का अपमान नही है , क्या ये मैडम अरुंधती लाखों भारतीय जवानों का अपमान नही कर रही  है ऐसा बोल कर .  क्या इतने बड़े लेखक होकर भी आप देश से प्यार करना नही सिख पाए , नही पर  देशभक्ति कोई सिखाने की चीज नही है ये खून में ही होती  है  अरे तुम जैसे गद्दार जयचंद  क्या जाने,  ये तो स्वतः ही आती है . लेकिन एक बात सत्य है अगर  आज भी हम  जागरूक नही हुए तो ऐसे जयचंद  बहुत  भरे पड़े है देश में,  जो चंद पैसों की खनक  के लिए कुछ भी कर सकते है

जननी जन्मभूमिस्च  स्वर्गादपि  गरीयसी

ये श्लोक ऐसे जयचंदों की समझ और यथार्थ  से कोसों दूर है . ऐसे जयचंदों को उनके मुह पर ही मुंहतोड़  जवाब देने की जरुरत है ताकि वो नयी  पीढ़ी में अपनी इस जयचंदी बीमारी को न फैला पाए.  ये लोग  वो दाग हैं देश पर जो हमेश कुढाते  है हमें . हमे समय समय पर याद भी दिलाते है देख लो जयचंद अभी नही मार नही है वो जिन्दा है आज भी इन जैसों की शक्लों में कंही उसका नाम कन्हैया है तो  कंही अरुंधती रॉय है .

जयचंदों तुम्हे नींद कैसे आ जाती है अपनी ही माँ को गाली देकर भी तुम अपना चेहरा आईने में देख  कैसे लेते हो . कहाँ  से लाते हो इतनी बेशर्मी , बेहयापना , कुछ तो इमान  रखा होगा या  सारा बेच खाया .  तुम्हे उन शहीदों के घरों की चीखें नही सुनाई  देती क्या , ऐसा कौनसी  रुई है, कौनसा  हैडफ़ोन है जो तुम्हे बेहरा कर देता है सारी चीखें दबा देता है  , क्या तुम्हे एक बार भी उस २३ साल के नौजवान उमर  फैयाज  , का ख्याल  नही आया जिसे शहीद हुए अभी एक महीना भी नही हुआ  है  ऐसी कौनसी सुरीली  पैसों की खनक है जिसे सुनकर तुम सारी चीखों, चीत्कारों को ,  शहीदों के घरवालों की   दारुण दशा सब को भुला कर बस उस खनक पर नृत्य करना शुरू कर देते हो  , अगर कभी अपने खुद के ह्रदय में दबे कुचले सहमे से  सहमे हिन्दुस्तानी को ढूढ़ पाओ , वैसे मुझे कोई उम्मीद नही है तुमसे की तुम ढूढ़ पाओगी    , फिर भी कभी वो मिल जाये तो  उससे पूछ लेना क्यूँ वो इतना डरा हुआ है क्यूंकि कभी वो तुम्हे दिखाई नही देता.

अरे मत कोस पगली कभी किसी शहीद की आत्मा को , अगले आदमी ने अपना जीवन कुर्बान कर दिया इस देश की रक्षा में , तुम जैसे जयचंदों की भी रक्षा की उन्ही जवानों ने की है जिन्हें तुम कोसती हो . याद रखना दुश्मन की गोली कभी आदमी नही पहचानती  बस अपनी दिशा में चलती है फिर चाहे सामने  दलाल ही क्यूँ न हो . निशाना लगाया और अधाधुंध फायर रर्र्र्रररर्र्र्रररर्र्र्रररर्र्र्रररर्र्र्रररर्र्र्रररर्र्र्रररर्र्र्रररर्र्र्रर

 

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