Tubelight review ईद का फायदा भी मुश्किल बचा पायेगा

tubelight फ़िल्म सलमान की अब तक की सबसे बेकार फिल्मों को टॉप कर चुकी है , tubelight जल तो जाती है मगर ये फ़िल्म कँही जलती हुई सी नजर नही आती। कबीर खान की बजरंगी भाईजान देखने के बाद ऐसा लगता नही था की वो इतनी बड़ी बकवास भी कर सकते हैं , इस फ़िल्म का पूरा दारोमदार सलमान के कन्धों पर है , पर सलमान को भी ज्यादा मौका कँहा दिया गया , पूरी फ़िल्म में बेचारे हिलाते रह जाते हैं कभी बोतल कभी पहाड़ , एक औसत यूट्यूबर भी शायद इससे अच्छी फ़िल्म बना लेता। जो क्रिटिक इस फ़िल्म में कुछ भी अच्छा बता रहें हैं वो पैसा खाये हैं और दिए किसने हैं पता नही क्योंकि सलमान खुद जिस फ़िल्म को नही देख सकते , उस फ़िल्म की झूटी तारीफ़ के लिए शायद ही पैसे दें। फ़िल्म शुरू एक सामाजिक सन्देश से होती है पर ना तो वो सन्देश ही रहता है फ़िल्म में ना कुछ और।

हाँ बस शुरू के आधे घण्टे में भाइयों को प्यार देखने को मिलता है , मेरी राय में सलमान के घर के फैमली फंक्शन की वीडियोग्राफी करा के अगर वो दिखा दी जाती तो भी शायद दर्शक अपने आपको ठगा महसूस नही करते 

कुल मिला के फ़िल्म घनगोर चुतियापा है किसी भी मामले में पूजा ढिंचक के सेल्फ़ी गाने से कम प्रताड़ित नही करती

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