कौन है भरतपुर का असली राजा ?

पहले तो में ये बात स्पष्ट कर दूँ कि हम बात कर रहे हैं,  21वीं सदी के भरतपुर की ,मतलब  सन 2000 से लेकर सन  2016 तक के भरतपुर की , उसके बाद के भरतपुर का विश्लेषण हम अलग से करेंगे.  2017 को भरतपुर का संक्रमणकालीन  समय कहा जा सकता है जिसमे कुछ भी स्पष्ट सा नजर नही आ रहा परन्तु भविष्य की रुपरेखा जरुर बनती हुई सी दिखाई देती है लेकिन उस पर अभी कुछ भी  कहना बहुत जल्दबाजी होगा , अतः उस विषय पर हम बाद में चर्चा करेंगे

2000 के बाद समूचे भारत में एक विकास की जो गति थी वो अपने से पहले के समय की अनुपात कंही ज्यादा थी, आप महसूस करोगे कि इन 15 – 16  सालों में जितना  परिवर्तना हुआ है ऐसा परिवर्तन आने में 50 साल और सरकारें कैसी भी रही हो परुन्तु देश में विकास हुआ है , बहस का विषय विकास की गति हो सकती है कम रही या ज्यादा रही, लेकिन  इस थत्य से कोई भी इनकार नही कर सकता.     

भरतपुर के सन्दर्भ में  , इसका कितना विकास हुआ जनता जनार्दन कितनी खुशहाल रही और कितनी परेशानियों को झेला , भरतपुर की आमजन की सुविधाओं में कितना विस्तार हुआ . भरतपुर के पास यूँ तो एक महाराज हैं और वो दोनों तरह से महाराज है राजशाही से भी और लोकतंत्र में भी जनप्रतिधि के रूप में भी. तो दूसरी  तरफ एक और भी थे जिनके पास केवल जनता का आशीर्वाद था. ये थे डॉक्टर दिगम्बर सिंह जो कि सामान्य परिवार से आते थे.

अब देखते हैं 2000-2016   के बाद जब पुरे  देश में  विकासशील परिवर्तन चल रहा था भरतपुर में भी उस काल में विकास हुआ, लेकिन जो एकाएक  विकास हुआ. वो हुआ 2003-2008 के दौरान. उस विकास में सर्वाधिक योगदान था तत्कालीन उद्योग मंत्री , स्वास्थ्य मंत्री डॉ दिगम्बर सिंह का, जो कि  भरतपुर की कुम्हेर सीट से विधायक थे.  भरतपुर जो हमेशा से  तीसरे दरजे के शहरों में गिना जाता रहा था.  ऐसे शहर को उन्होंने  सम्भाग का दर्जा दिलवाया जो कि एक बड़ी कामयाबी थी . इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी से जूझ रहे भरतपुर के विकास को  इससे काफी गति मिली. भरतपुर पूरे  राजस्थान में  ब्रज संस्कृति से परिपूर्ण सबसे बड़ा केंद्र है भरतपुर में  एक भी यूनिवर्सिटी ना होना बहुत ही  कचोटता रहा. छात्रों को भी  कई परेशानियों का सामना करना पड़ता था.ऐसे समय में अपने पद और पहुँच का पूरा लाभ उठाते हुए उन्होंने भरतपुर में ब्रज यूनिवर्सिटी के लिए हरी झंडी दिलवाई. उनके मंत्री काल में भरतपुर में रियल स्टेट का  गोल्डन पीरियड रहा, भरतपुर में चहुँ और विकास हो रहा था. कई बायपास मार्गों का निर्माण हुआ.

डॉ दिगम्बर, वो जन्म से राजा नही थे लेकिन कर्म से राजा बने जनता का आशीर्वाद प्राप्त किया. विकास को तरस रहे  भरतपुर को विकास पथ पर अग्रसर किया और स्वयं विकास पुरुष कहलाये. दुर्भाग्यवश 2008 के चुनावों के परिणाम में बीजेपी के हार वजह से इस विकास गति पर रोक लग गई. डॉक्टर दिगम्बर सिंह ने   उपेक्षित पड़े भरतपुर को उसका सम्मान दिलवाया. राजस्थान की राजनीति में भूले बिसरे पड़े भरतपुर को  यथेष्ट स्थान मिला. हालाँकि हम किसी पार्टी विशेष के  समर्थक कतई नही है परन्तु किसी व्यक्ति के किये  भागीरथी प्रयासों को उसकी और सफलताओं पहचान देना हमारा नैतिक दायित्व है.  

डॉ दिगम्बर सिंह  वो राजा हैं जिसने राजधानी में ऐसा झंडा गाढ़ा कि हुकूमत को वर्षो से लम्बित पड़ी भरतपुर की  मांगों पर मुहर लगानी. इसके बाद से उन्हें विकास पुरुष कहा जाने लगा.

जो वर्षों भरतपुर के विकास के लिए उत्तरदायी थे वो भूल गये थे कि अपना गौरवशाली इतिहास , या तो उन्हें जनता की पीढ़ा सुनाई देती नही थी या जज्बा ख़त्म हो गया था . वैसे भी जब आपके  दोनों हाथों में लड्डू हों (लोकतंत्र-राजतंत्र) और अपने यशस्वी इतिहास को  भूल जाओ तो स्वतः ही जनता की आवाज सुनना बंद हो जाती है.

दूसरी तरफ डॉ दिगम्बर सिंह  जिन्होंने एक मामूली किसान के बेटे होते हुए वर्षों से विकास को तरस रही इस भरतपुर की आम  जनता के दर्द को समझा और अपने पद का भरपूर लाभ उठाते हुए भरतपुर को अधिकतम लाभ दिलाया.

 आप स्वयं वोट डालकर तय करें कौन है असली राजा, जिसने जन्म लिया या जिसने करम किया ?

  • महाराज विश्वेन्द्र सिंह (44%, 81 Votes)
  • डॉक्टर दिगम्बर सिंह (56%, 104 Votes)

Total Voters: 185

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One thought on “कौन है भरतपुर का असली राजा ?

  • March 24, 2018 at 8:02 am
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    यह बात सही है की डा़. Digamber Singh G nai jo kiya h voo… Koe nhi kr skta BHARATPUR ke liye aur… Deeg-Kumher ke liye… Digamber singh G bhut achhe पढ़े लिखे आदमी थे।।। ab unke smaan ek आदमी आया है Manudev Bhaiya सिनसिनी ।।। vo he vikaas krva skte h.. पढ़े लिखे अच्छा आदमी है।। परिवार भी बहुत पढा लिखा हुआ है ।।। नाम है झेञ मे।।।

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