मैं महान गैंगस्टर श्री आनंदपाल जी का समर्थन क्यूँ नही कर पाया ?

यह लेख श्री पूरण प्रकाश अग्रवाल जी के ब्लागस्पाट से लिया गया है

महान गेंगस्टर श्री आनंद पाल की के कथित फेंक एनकाउंटर की CBI से जांच की मांग सरकार द्वारा मान ली गयी है। इस मांग के लिये बसों, रेलवे स्टेशन, पुलिस थानों को जलाने, पुलिस वालों को पीटने वाले प्रदर्शकारियों, सोशल मीडिया के योद्धाओ ओर जो सिर्फ मन मे मांग कर रहे थे (जैसे पुराने जमाने मे युवा मोहल्ले की सुंदर लड़की से मन ही मन ही प्यार करते थे ) , सभी को बहुत बहुत बधाई।

मेरा भी मन था कि मैं इस वीर योद्धा के वीर गति को प्राप्त होने के कारणों की  CBI, NIA, या  FBI जांच की मांग के लिए प्रदर्शन करू,निक्कमी सरकार के एसेट्स जला दु, भ्रस्ट पुलिस वालों को पीट दू। आखिर 7 कत्ल के आरोप, जिसमे एक ऐसा भी है कि मृतात्मा की लाश को टुकड़े टुकड़े कर जला दिया, अवैध वसूली ओर अवैध सोम रस के कारोबार को खड़ा करना कोई छोटी बात तो थी नही। उस पर से व्ययाम के प्रति अप्रितम प्रेम, जिसको उन्हें मिस्टर वर्ल्ड जैसी बॉडी व कवि हृदय दिल ने उनको नये फ़ैशन के वस्त्र धारण करने का का टेस्ट दिया। पढ़ेगी नारी तो बढ़ेगी नारी के सिद्धांत का पालन करते हुए न केवल पुत्रियों को पढ़ने विदेश भेजा वल्कि अपनी सेना की मुखिया भी एक महिला को बनाया। बीच बीच मैं जब भी समय मिला तो कुछ सम्पति हथिया ली ताकि उसका उचित उपयोग हो सके। इस महान योद्धा को जेल की चार दिवारी भी रोक नही पाई और कायर पुलिस वालों पर गोली बरसाते हुए उनके सामने से निकल गए। राजस्थान पुलिस ने करोड़ो बर्बाद कर दिए पर निक्कमी पुलिस नही पकड़ पाई। सरकार हंसी का पात्र ओर श्री आंनद पाल जी चारणों द्वारा गायन के मुख्य पात्र बने।

ऐसे महान गेन्स्टर के कथित फैंक एनकाउंटर मैं भाग लेना चाहिये।ऐसा विचार मेरे मन मे आया। परंतु तभी मेरी निगाह अपने वयस्क होते पूत पे पड़ी। हर पिता अपने पुत्र का पहला हीरो होता है। ऐसा मैंने चवन्नी छाप साहित्य और B ग्रेड की फिल्मों मैं देखा सुना है। हालांकि पुत्र ने कभी भी व्यवहार, आचरण और बोल के गलती से भी मुझे हीरो वाली इज़्ज़त नही दी। पर मैं साहित्य की बात को ही सत्य मानता हूं क्यूंकि वो मेरे पक्ष मे थी।

अतः मस्तिश्क मैं ये विचार आया कि ,कही पुत्र ने पूछ लिया कि, हे मेरी माता के दास, आज ये हाथ मे लकड़ी ले कर कहाँ जा रहे हो। ओर ये बताने पर की मैं श्री आनंद पाल जी के समर्थन मैं जा रहा हूं। वो ये सहज प्रश्न करेगा कि कौन श्री आनंद पाल जी। क्या ये माँ भारती के सेवा मैं वीर गति को प्राप्त हुए। उनका जीवन चरित्र बताओ। मैं उनको फॉलो करूँगा। मैं भी उनके जैसा बनूँगा।

माँ भवानी की कसम , जैसे ही पुत्र का ये प्रश्न ओर चेहरा सामने आया जिसके एक हाथ मे AK 47 दूसरे हाथ मैं  कमांडो सोहन सिंह की गर्दन, गले मैं 7 नर मुंडो की माला, मैं धम्म से वही बैठ गया। अपने पुत्र को मेजर बत्रा बनते देखना चाहता हूं या महान गेन्स्टर श्रीमान आंनद पाल। बस इसी व्यथा ने मुझे जाने नही दिया।

छमा प्रार्थी हूँ। 

Writer- shri Puran Prakash Agarwal

twitter handle of the writer @ppagarwal

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